जबलपुर में खुलेगा डेयरी साइंस टेक्नोलॉजी कॉलेज, हर वर्ष तैयार होंगे 40 डेयरी इंजीनियर

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डेयरी टुडे नेटवर्क,
जबलपुल(एमपी), 13 जुलाई 2019,

मध्य प्रदेश में अब डेयरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई का रास्ता साफ हो गया है। जबलपुर में अगले शैक्षणिक सत्र से डेयरी साइंस टेक्नोलॉजी कॉलेज शुरू हो जाएगा। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद डेयरी साइंस की डिग्री मिलेगी। यह मध्य प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय होगा जहां डेयरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी का पाठयकम शुरू होगा।

इसे लेकर वेटरनरी विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिकतर औपचारिकताएं पहले ही पूरी कर ली हैं। कॉलेज के लिए विवि प्रशासन के पास जमीन है। वहीं पांचवीं डीन कमेटी पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुशंसा कर चुकी है। मध्य प्रदेश इस समय देश में दुग्ध उत्पादन में तीसरे नंबर का राज्य बन चुका है। राज्य में डेयरी साइंस के विशेषज्ञों की खासी मांग है। जाहिर है कि इस कॉलेज के बनने के बाद डेयरी साइंस के स्पेशलिस्ट इंजीनियर निकलेंगे।

वेटरनरी यूनिवर्सिटी की इमलिया क्षेत्र में कई एकड़ जमीन खाली पड़ी है। 18 एकड़ भूमि पर इसका निर्माण किया जाएगा। यह जगह जबलपुर दुग्ध संघ के नजदीक है। राज्य शासन ने बजट में 2 करोड़ रुपए जारी किए हैं। निर्माण कार्य शुरू होते ही इस राशि में इजाफा हो सकेगा। कॉलेज के लिए करीब सवा सौ करोड़ की आवश्यकता जताई गई है।

डेयरी साइंस कॉलेज खुलने से डेयरी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू होगी। डिग्री कोर्स के माध्यम से पहले चरण में 40 सीटों के साथ इसकी शुरुआत की जाएगी। कॉलेज में प्रवेश AIEEE के माध्यम से किया जाएगा। पाठयक्रम में मिल्क,फूड प्रोसेसिंग, फूड इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराई जाएगी। देश में केवल तीन जगह ही ये संस्थान हैं। राजस्थान, पंजाब और छत्तीसगढ़ में डेयरी साइंस से जुड़ी पढ़ाई हो रही है। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीडी जुयाल ने कहा कि डेयरी साइंस टेक्नोलॉजी कॉलेज शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश के लिए वरदान होगा। विवि प्रशासन ने काफी हद तक पहले से इसकी तैयारी शुरू कर दी थी। शासन से बजट में अनुशंसा किए जाने के बाद अब हम इस दिशा में तेजी से काम शुरू करेंगे।

विवि प्रशासन लम्बे समय से डेयरी साइंस कॉलेज की स्थापना के लिए प्रयासरत है। कार्ययोजना लागू करने के लिए विवि जबलपुर दुग्ध संघ के साथ छह माह पूर्व ही एमओयू साइन कर चुका है। कॉलेज में पढऩे वाले छात्र दुग्ध संघ के प्लांट के माध्यम से प्रैक्टिकल, अनुसंधान जैसे कार्य कर सकेंगे।
(साभार- पत्रिका)

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