डेयरी किसानों पर Corona की मार, नहीं मिल रहे दूध के खरीदार, आधा रह गया Dairy का कारोबार !

नवीन अग्रवाल, डेयरी टुडे नेटवर्क,
नई दिल्ली, 26 मार्च 2020,

कोरोना लॉकडाउन की वजह से Dairy किसानों, दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों पर शामत आ गई है। देशभर में बाजार बंद होने से लाखों-लाख दुग्ध उत्पादकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। दरअसल लॉकडाउन की वजह से दुग्ध उत्पादकों को दूध के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। जाहिर है कि भारत में डेयरी बिजनेस, दुग्ध की आपूर्ति का लगभग 70 प्रतिश से अधिक हिस्सा आज भी असंगठित क्षेत्र के हाथों में हैं। यानि 70 प्रतिशत से अधिक पशुपालक और डेयरी किसान Dairy कंपनियों को नहीं बल्कि सीधे उपभोक्ताओं को दूध बेचते हैं। कोरोना लॉकडाउन की वजह से देश के सभी राज्यों में मिठाई की दुकानें, होटल, रेस्टोरेंट आदि बंद पड़े हैं। दूध की सप्लाई में कमी होने की वजह से लोकल स्तर पर चलने वाले Milk Collection सेंटर, चिलिंग प्लांट, Milk Powder बनाने वाले फैक्टरियों, मावा बनाने, देसी घी बनाने, क्रीम निकालने आदि का धंधा भी पूरी तरह बंद हो गया है।

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दूध के खरीद रेट में 5 से 10 रुपये प्रति लीटर की कमी

इतना ही नहीं डेयरी टुडे को राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड समेत तमाम राज्यों के पशुपालकों ने बताया है कि मदर डेयरी, Amul Dairy, सांची डेयरी, Verka डेयरी, सरस डेयरी, आंचल डेयरी, Ananda डेयरी समेत ज्यादातर डेयरी कंपनियों और कॉपरेटिव ने दूध की खरीद कर कर दी है। इस वजह से दूध के खरीद रेट में 5 से 10 रुपये प्रति लीटर की कमी हो गई है। हालांकि अमूल, मदर डेयरी समेत तमाम डेयरी कंपनियों के अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने कोरोना संकट के समय दूग्ध की आपूरि बढ़ाने के लिए पशुपालकों से दूध की खरीद बढ़ा दी है। लेकिन उनके इस दावे में कोई सच्चाई नजर नहीं आ रही है। डेयरी विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि इस नाजुक मौके पर अधिकतर डेयरी कंपनियों ने अपने पास जमा एसएमपी यानी स्किम्ड मिल्क पाउडर के स्टॉक को खपाना शुरू कर दिया है और इसी से दूध, दही, पनीर जैसे Dairy Product धड़ल्ले से बनाए और बेचे जा रहे हैं।

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पशुपालकों पर तीन तरफा मार, कैसे चलेगी डेयरी का कारोबार

पशुपालकों पर एक और मार इन दिनों पड़ रही है। वो है पशु आहार की सप्लाई में बाधा और उसकी कीमत बढ़ना। यानी देशभर के पशुपालक इस वक्त तीन तरफा मार से गुजर रहे हैं। एक तरफ तो उन्हें अपने दूध का खरीदार नहीं मिल रहा है, दूसरी तरफ कंपनियां दूध की सही कीमत नहीं दे रही है और तीसरा पशुओं को खिलाने-पिलाने का खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। देशभर के पशुपालक सरकार से पैकेज की मांग कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले केंद्रीय डेयरी और पशुपालन मंत्री गिरिराज सिंह ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बातचीत की थी, लेकिन करीब एक हफ्ता गुजर जाने के बाद भी देश के डेयरी सेक्टर के किसी आर्थिक पैकेज का ऐलान नहीं किया गया है। कुल मिलाकर कोरोना संकट भारत के लाखों-लाख डेयरी किसानों और पशुपालकों के लिए कहर बनकर आया है, इससे जुड़े लोगों का व्यवसाय आधा रह गया है। परेशान करने वाली बात ये है कि फिलहाल आने वाले दिनों में डेयरी किसानों को इस संकट से उबरने का कोई रास्ता भी नजर नहीं आ रहा है।

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9 thoughts on “डेयरी किसानों पर Corona की मार, नहीं मिल रहे दूध के खरीदार, आधा रह गया Dairy का कारोबार !”

  1. बेचारा पशुपालक ।।और कुछ नहीं कहना है ।

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