एनिमल वेलफेयर बोर्ड के सदस्य मोहन अहलुवालिया का दावा- दूध में 65 फीसदी मिलावट

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डेयरी टुडे डेस्क,
नागपुर. 27 सितंबर 2017,

सेहतमंद दूध नहीं, हम जहरीले दूध का सेवन कर रहे हैं। आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। अगर सिर्फ नागपुर जिले की बात करें तो वर्ष 2016-17 में साल भर में यहां 12 करोड़ 32 लाख 33 हजार 202 लीटर दूध की खपत हुई। जिले की आबादी के अनुपात में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 150 ग्राम दूध हिस्से में आता है, जबकि यहां दूध का इस्तेमाल प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 433 ग्राम है। यह साफ है कि शेष 283 ग्राम दूध मिलावटी होता है। मिलावट का आंकड़ा इस्तेमाल किए जाने वाले दूध का लगभग 65 फीसदी है।

एफएसएसएआई की रिपोर्ट भी बताती है कि 68 प्रतिशत दूध जहरीला है और हम आपको बता दें कि दूध में मिलावट के लिए धड़ल्ले से ड्राई मिल्क का इस्तेमाल हो रहा है। हालात यह है कि देश में इस ड्राई मिल्क का कारोबार 268 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। यह जानकारी एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के सदस्य मोहन अहलुवालिया ने नागपुर दौरे के दौरान मंगलवार को दी। वे रविभवन के सभागृह में आयोजित पत्र-परिषद को संबोधित कर रहे थे।

मिलावटी दूध से बचने के कर रहे उपाय

-नागपुर में ‘लाइव लैब’ स्थापित करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। इस लाइव लैब में आम लोग अपने दूध की जांच मात्र आधे घंटे में कर सकेंगे। परीक्षण 12 रुपये में किया जा सकेगा। बाद में इसे नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।

– दिल्ली के ‘मिल्क मंडी’ की तर्ज पर नागपुर में मिल्क फेस्टिवल कराने की इच्छा भी उन्होंने जाहिर की।

– नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से मदर डेयरी के माध्यम से जिले में 90 दिन के भीतर 363 गांवों में दूध खरीदी केंद्र शुरू किए जाएंगे। यहां किसानों से 37 से 40 रुपए प्रति लीटर की दर से दूध खरीदी किया जाएगा। फिलहाल 6 गांवों में इसका कलेक्शन हो रहा है।

रेलवे का दूध भी खरा नहीं

– मोहन अहलूवालिया ने एफएसएसआई(फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट के हवाले से उत्तर प्रदेश के दूध में 100 प्रतिशत मिलावट की जानकारी दी। वहीं 72 प्रतिशत दूध घातक साबित हो रहा है। रेलवे द्वारा उपलब्ध कराए जानेवाले दूध को भी एफएसएसआई अपने मानकों के विपरीत मानता है।

अन्य राज्यों में भी हालत खराब

हरियाणा में पशुओं की संख्या में लगातार गिरावट आने के बाद भी वहां दूध की मांग 833 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन है, जबकि दूध उपलब्धता मात्र 172 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन ही है। शेष मांग को पूरा करने के िलए राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात से दूध आयात किए जाने का हवाला दिया जाता है।

(साभार-दैनिक भास्कर)

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