ओडिशा के दो युवा इंजीनियरों को सलाम, जिन्होंने Farmtree App से Dairy किसानों की मुश्किलों को किया आसान

नवीन अग्रवाल, डेयरी टुडे नेटवर्क,
नई दिल्ली, 8 फरवरी 2020,

भारत में डेयरी फार्मिंग और पशुपालन का भविष्य उज्ज्वल है, डेयरी से जुड़ा कारोबार भी लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इससे जुड़े किसानों और पशुपालकों की इनकम उस अनुपात में नहीं बढ़ रही है। ऐसा क्यों है, इसके पीछे क्या कारण है, डेयरी किसानों को आधुनिक टेक्नोलॉजी से कैसे जोड़ा जाए, ऐसे ही कुछ सवालों से जूझते हुए ओडिशा के दो युवा इंजीनियरों ने एक ऐसा मोबाइल एप बना डाला, जिसने डेयरी किसानों की जिंदगी बदल दी है। Farmtree नाम का यह मोबाइल एप डेयरी किसानों की हर मुश्किल को मिनटों में हल कर देता है। ‘डेयरी के सुल्तान’ में पेश की जाने वाली Success Stories में आज हम आपके सामने लेकर आए हैं, इन्हीं दो युवा इंजीनियर अनिल मिश्रा और सचिन गर्ग की कहानी, जिन्होंने अपने इनोवेशन से Dairy किसानों की किस्मत बदल दी है।

Dairy Today से बातचीत के दौरान Farmtree के को-फाउंडर अनिल मिश्रा ने बताया कि उन्होंने 2012 में भुवनेश्वर के इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था, जबकि उनके साथी सचिन गर्ग ने इलेक्ट्रॉनिक्स में। कॉलेज के दिनों से ही उन्हें अपने दोस्तों के साथ कुछ नया और इनोवेटिव करने का शौक था। बीटेक के बाद दोनों ने बैंगलुरू में नामी कंपनियों में चार साल तक नौकरी भी की।

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जानिए कैसे आया Farmtree App बनाने का विचार

डेयरी सेक्टर में कुछ नया करने का कैसा सोचा, इस सवाल के जवाब में अनिल ने बताया कि उनके एक कॉलेज के मित्र अविक सेन डेयरी फील्ड से जुड़े थे और 2016 में एक दिन अचानक उनका फोन आया कि जयपुर के दो बड़े डेयरी किसानों को अपने फार्म के लिए सॉफ्टवेयर की जरूरत है, ताकि वे अपना काम कुछ आसान कर सकें। इसके बाद अनिल और सचिन गर्ग जयपुर पहुंच गए, वहां उन्होंने डेयरी किसानों की जरूरतों को सुना, इसी सिलसिले में आसपास के छोटे डेयरी किसानों से भी मिले। इसी दौरान इन दोनों को एहसास हुआ की डेयरी सेक्टर और खासकर पशुपालन के क्षेत्र में काफी कुछ करने की जरूरत है। बस वहीं से इनके मन में एक ऐसा मोबाइल एप डेवलप करने का विचार आया, जो डेयरी किसानों की हर समस्या का समाधान करे और जिसे हिंदुस्तान का हर डेयरी किसान आसानी से उपयोग कर सके।

अनिल मिश्रा ने बताया कि उन्होंने अपने दोस्त सचिन गर्ग के साथ मिलकर जून, 2017 में Farmtree नाम से मोबाइल एप की शुरुआत की। इस दौरान दोनों दोस्तों ने अपनी नौकरी के दौरान की गई बचत को अपने नए प्रोजेक्ट में खर्च किया। जब Farmtree मोबाइल एप को लेकर दोनों डेयरी किसानों के बीच गए तो उन्हें काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली।

एप डेयरी फार्म मैनेटमेंट कंपनी की तरह करता है काम

आखिर उनके मोबाइल एप में ऐसा क्या है, जो Dairy Farming करने वाले किसानों का काम आसान हो जाता है। इस सवाल के जवाब में युवा इंजीनियर अनिल मिश्रा ने बताया कि भारत में डेयरी फार्मिंग का तरीका विदेशों से काफी अलग है, यहां हर राज्य में वहां की आबोहवा के मुताबिक गायों को पालने का तरीका बदल जाता है। नॉर्थ के हिसाब से दक्षिण भारत के इलाकों में गायों का पालन नहीं किया जा सकता है। अनिल ने बताया कि उनका मोबाइल एप डेयरी फार्म मैनेटमेंट कंपनी की तरह काम करता है, जिसे हर डेयरी फार्मर आसानी से इस्तेमाल कर सकता है।

अनिल के अनुसार डेयरी किसानों की सबसे बड़ी दिक्कत ब्रीडिंग और वेक्सिनेशन है। वेक्सिनेशन कब करना है, कब गाय का हीटिंग पीरियड शुरू हो रहा है, इसका आंकड़ा रखना भी कठिन काम है। लेकिन Farmtree App में डेयरी फार्म के हर पशु की जानकारी को एकत्र किया जाता है, उसके वजन, उम्र के हिसाब से उसकी डाइट, हीटिंग टाइम, वेक्सिनेशन का टाइम का आंकड़ा रखा जाता है। कोई गाय रोजाना कितना दूध दे रही है इसका पूरा रिकॉर्ड भी एप में रखा जाता है। इतना ही नहीं डेयरी किसानों को एसएमएस के जरिए नियमित तौर पर इसकी जानकारी दी भी जाती है।

डेयरी फार्म और पशु की हर जानकारी मोबाइल में

Farmtree App के माध्यम से उनकी कंपनी किसान को बताती है कि उनके डेयरी फार्म की आर्थिक स्थिति कैसी है, प्रति लीटर प्रोडक्शन कॉस्ट कितनी आ रही है। कौन सा पशु मुनाफा कमा रहा है और कौन सा नुकसान कर रहा है। वे ये भी बताते हैं कि एक डेयरी फार्म में नॉन प्रोडक्टिव कैटल कितने होना चाहिए, बछिया कितनी तैयार करनी चाहिए। छोटी से छोटी चीजों के आंकड़े सिस्टम में रहते हैं। अनिल जहां सेल्स और मार्केटिंग का काम संभालते हैं, वहीं सचिन अपग्रेडेशन और डेवलपमेंट का।

 

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अनिल बताते हैं कि लगभग तीन साल में उनका दायरा पूरे भारत में फैल गया है। आज Farmtree App के साथ करीब 2500 डेयरी किसानों का परिवार है। गुजरात में 450 किसान, पंजाब में 180, यूपी में 140 किसान, दक्षिण भारत में 135 किसान, नॉर्थ ईस्ट में 60 किसान, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में भी सैकड़ों डेयरी किसान उनके मोबाइल एप का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रोजना देते हैं 13,500 पशुओं के पल-पल के आंकड़े

अनिल ने बताया कि छोटे पशुपालक जिनके पास 10 पशु तक होते हैं, उन्हें वे फ्री में अपनी सर्विस देते हैं। इस वक्त उनके पास 13,500 एक्टिव पशु हैं, जिनका पूरा लेखाजोखा वे डेयरी किसानों को प्रतिदिन के हिसाब से भेजते हैं। उनकी कंपनी फिलहाल नो प्रॉफिट नो लॉस पर चल रही है। लेकिन अब वे अपना दायरा बढ़ा रहे हैं, अन्य किसानों को भी जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अनिल और सचिन ने ओडिशा के राउरकेला और गुजरात के आणंद में दो सेंटर खोले, जहां उनकी टीम बैठ कर दिनरात डेयरी किसानों की समस्या का समाधान करने में जुटी रहती है। इतना ही नहीं उनकी इस मुहिम में आईआईटी कानपुर और आईएआरआई, पूसा, दिल्ली का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। अनिल और सचिन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उनके नेटवर्क में 3 लाख से अधिक पशु होंगे और 50 से 60 हजार किसान फार्मट्री एप से जुड़ जाएंगे।

अनिल का कहना है कि उनका Farmtree Mobile App डेयरी फार्म में मिल्किंग स्टॉक, परचेजिंग, लेबर मैनेजमेंट जैसे कामों का हिसाब रखता है। यानि एक हिसाब से यदि कोई डेयरी किसान Farmtree App इस्तेमाल करता है, तो वो बस हर पशु से जुड़े एसएमएस पर नजर रखे, उसके मुताबिक काम करे और बाकी सारी चिंता Farmtree App की टीम पर छोड़ दे।

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दूध की प्रोडक्शन कॉस्ट जानना बेहद जरूरी- अनिल मिश्रा

इंजीनियर अनिल मिश्रा ने डेयरी फार्मिंग के बिजनेस के लिए एक और महत्वपूर्ण बात बताई। उन्होंने कहा कि देश में डेयरी किसानों को सोच बदलना होगा, उन्हें दूध की कीमत के बारे में नहीं, बल्कि प्रोडक्शन कॉस्ट कम करने के बारे में सोचना चाहिए। क्योंकि फार्म में कई चीजें ऐसी होती है, जो गैरजरूरी हैं और उनसे अनावश्यक खर्चा बढ़ता है। अनिल का अगला लक्ष्य डेयरी से जुड़ी लो कॉस्ट ओटोमेशन टेक्नोलॉजी विकसित करने का है।

अगर आप भी Farmtree App से का इस्तेमाल कर अपने डेयरी फार्मिंग के बिजनेस को आसान बनाना चाहते हैं तो कंपनी की निम्न वेबसाइट और मोबाइल नंबर से संपर्क कर सकते हैं।

वेबसाइट- http://inhof.in
मोबाइल नंबर- +91 6351161920
Farmtree AppFarmtree FarmManager

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