BHU के डेयरी साइंस विभाग ने माइक्रो इन कैप्सूल से बढ़ाई दूध की शक्ति, बनाया फोर्टिफाइड मिल्क

डेयरी टुडे नेटवर्क,
वाराणसी, 21 जून 2020,

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अब दूध की शक्ति बढ़ाने का प्रयोग किया गया है। बीएचयू के डेयरी साइंस डिपार्टमेंट ने बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए माइक्रो इन कैप्सूल के माध्यम ओमगा-3 फैटीएसिड (फोर्टिफाइड) दूध तैयार किया गया है। माइक्रो इन कैप्सूल के माध्यम से दूध में मिला ओमेगा-3 पेट में जाने के बाद कैप्सूल से बाहर निकलता है। इसलिए दूध के रंग, गंध व स्वाद में कोई अंतर नहीं होता है। यह कैप्सूल इतना छोटा होता है कि आंखों से दिखता भी नहीं है।

जाहिर है कि बच्चा जब इस दूध को पीएगा तब इस कैप्सूल में बंद ओमेगा-3 फैटीएसिड पेट में मौजूद पाचन रस के सम्पर्क में आएगा। रेडी टू सर्व इस दूध में विटामिन ए और डी भी है। बीएचयू के दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख प्रो. डीसी राय ने बताया कि दूध अपने आप में एक संतुलित आहार है। पर इसे और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया गया है। काफी अध्ययन के बाद ओमेगा-3 फैटीएसिड मिला दूध तैयार करने में शोधार्थी सफल हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस दूध में मिलाया गया ओमेगा-3 अलसी से प्राप्त किया गया है। ओमेगा-3 फैटीएसिड मछली में भी पाया जाता है, लेकिन दूध में मिलाने के लिए अलसी से प्राप्त ओमेगा-3 का उपयोग किया गया है।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने भी दूध के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। शुरुआत में चूहों पर इसका प्रयोग चल रहा है। अध्ययन के परिणाम उत्साहजनक हैं। इसके बाद यह दूध स्कूली बच्चों को देने की योजना है। इसमें बच्चों का चयन कर उन्हें प्रतिदिन यह दूध पिलाया जाएगा। फिर उनके रक्त का परीक्षण कर आंकड़ों का विश्लेषण होगा।

प्रो. डी सी राय के दिशा निर्देशन में डॉ. विनोद पासवान, डॉ. अरविंद इस पर काम कर रहे हैं। यह दूध बच्चों के साथ ही नौजवानों और वृद्धों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। इसमें मिला ओमेगा-3 फैटीएसिड हार्टअटैक से भी बचाव करेगा। माइक्रो इन कैप्सूल बेहद सूक्ष्म कैप्सूल होते हैं। इन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता। इनके अंदर ओमेगा-3 फैटीएसिड भरा जाएगा। जो शरीर के अंदर पाचन रस में ही घुलेगा।

200 एमएल की बॉटल में पैक
दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग ने ओमगा-3 दूध को 200 एमएल की सील बंद बॉटल भी तैयार की गई है। चूंकि बहुत से बच्चों को दूध का स्वाद पसंद नहीं होता इसलिए इसे फ्लेवर युक्त बनाने पर भी काम चल रहा है। इसे चॉकलेट, वनीला, स्ट्रावेरी व अन्य फ्रूट फ्लेवर में भी बनाया जा सकता है।
(साभार- हिंदुस्तान)

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